विधानसभा में गूंजा राजनांदगांव सामूहिक जल प्रदाय योजना का मामला, विधायक दलेश्वर साहू ने उठाए सवाल
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के दौरान राजनांदगांव जिले की सामूहिक जल प्रदाय योजना की स्वीकृति का मामला गरमाया। विधायक दलेश्वर साहू ने इस विषय पर उपमुख्यमंत्री अरुण साव से जवाब मांगा और योजना की स्वीकृति से जुड़े दस्तावेजों पर सवाल उठाए।
विधायक साहू ने उपमुख्यमंत्री से पूछा कि क्या योजना को स्वीकृति दी गई है? इस पर अरुण साव ने बताया कि राजनांदगांव जिले में पहले से 14 करोड़ रुपये की लागत से दो योजनाएं स्वीकृत हैं, जिनके माध्यम से 303 गांवों को पानी उपलब्ध कराने की योजना है।
भूमि स्वीकृति को लेकर तीखी बहस
विधायक दलेश्वर साहू ने जानना चाहा कि किस नक्शे और खसरे के आधार पर इस योजना को स्वीकृति दी गई है। उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने जवाब दिया कि नक्शा और खसरा उन्हें पहले ही उपलब्ध कराया जा चुका है और यह योजना शासकीय जमीन पर पंचायत के प्रस्ताव के आधार पर स्वीकृत हुई है।
लेकिन विधायक साहू ने इस दावे को चुनौती दी और कहा कि यह जमीन किसी किसान के नाम पर दर्ज है और सरकार इसे अपने विभाग के अंतर्गत भी ला सकती थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जो जानकारी दी जा रही है, वह पूरी तरह से सही नहीं है।
जांच कराने पर बनी सहमति
विधायक साहू ने निर्माण कार्य की जांच की मांग करते हुए उपमुख्यमंत्री से सवाल किया कि क्या वे करोड़ों रुपये की लागत से हुए इस निर्माण की जांच उनकी उपस्थिति में कराएंगे?
इस पर उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने आश्वासन दिया कि सदस्य की मांग पर उनकी उपस्थिति में जांच कराई जाएगी।
सदन में रही जोरदार बहस
इस मुद्दे पर सदन में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। विधायक साहू ने आरोप लगाया कि योजना की स्वीकृति में गड़बड़ी की गई है और सरकारी दस्तावेजों में भी विरोधाभास है। वहीं, उपमुख्यमंत्री साव ने कहा कि योजना को पूरी पारदर्शिता के साथ लागू किया गया है और कोई भी अनियमितता पाई जाती है, तो जांच के लिए वे तैयार हैं।
अब देखना होगा कि विधानसभा में उठे इस मामले में जांच कब और कैसे होती है, और क्या इसमें किसी तरह की अनियमितता सामने आती है या नहीं।