महासमुंद में पेयजल संकट का मुद्दा विधानसभा में गूंजा, विधायक द्वारिकाधीश ने उठाए सवाल
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में महासमुंद जिले के नगरीय निकाय क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था को लेकर बड़ा मुद्दा उठा। विधायक द्वारिकाधीश यादव ने नगर पालिका बागबाहरा में गंभीर पेयजल संकट का मामला सदन में उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा।
विधायक ने लगाए गंभीर आरोप
विधायक ने आरोप लगाया कि नगर निगम और प्रशासन इस समस्या को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। उन्होंने कहा, “नगर निगम में पानी की भारी समस्या है, लेकिन सरकार का जवाब उतना गंभीर नहीं है। सरकार कह रही है कि कोई प्रस्ताव नहीं आया, जबकि प्रस्ताव पारित हो चुका है। यह सदन को गुमराह करने जैसा है।”
उपमुख्यमंत्री का जवाब
इस पर उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने जवाब देते हुए कहा कि नगर पालिका बागबाहरा को 40 लाख रुपये और वित्तीय वर्ष 2024-25 में 1 करोड़ 33 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है। साथ ही, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि “अगर अमृत मिशन 2 के लिए नगर निगम से कोई प्रस्ताव आएगा, तो विचार किया जाएगा।”
बिना जल स्रोत के पाइपलाइन और टंकी निर्माण पर सवाल
विधायक ने सरकार से सवाल किया कि जब जल स्रोत ही नहीं है, तो पाइपलाइन और टंकी निर्माण का क्या औचित्य है? उन्होंने इसे धन का दुरुपयोग बताते हुए इस पर कार्यवाही की मांग की।
जांच का आश्वासन
इस पर उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि अगर किसी तरह की गड़बड़ी हुई है, तो इसे संज्ञान में लाकर परीक्षण कराया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसी भी अनियमितता पर उचित कार्रवाई की जाएगी।
अब सवाल यह उठता है कि बिना जल स्रोत के पाइपलाइन बिछाने और टंकी निर्माण की जिम्मेदारी किसकी है? क्या इस पर प्रशासन कोई ठोस कार्रवाई करेगा?
महासमुंद के नागरिक अब सरकार की जांच प्रक्रिया और आगामी फैसलों का इंतजार कर रहे हैं।