महासमुंद। भारतीय बौद्ध महासभा जिला महासमुंद की बैठक रविवार को अत्यंत गरिमामय माहौल में सम्पन्न हुई। कार्यक्रम का शुभारंभ भंते जी बी. करुणा बोधी जी की उपस्थिति में त्रिशरण एवं पंचशील लेकर किया गया। बौद्ध धम्म की मूल शिक्षाओं और डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों को जन-जन तक पहुँचाने के संकल्प के साथ यह बैठक सामाजिक और संगठनात्मक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
राष्ट्रीय व प्रांतीय पदाधिकारियों की मौजूदगी
बैठक में भारतीय बौद्ध महासभा के राष्ट्रीय ट्रस्टी आयु. अलका ताई बोरकर तथा प्रदेश महासचिव आयु. भोजराज गौरखेड़े विशेष रूप से उपस्थित रहे। इनके साथ ही आयु. नरेंद्र बोरकर और आयु. संघमित्रा गौरखेड़े ने भी संगठन की मजबूती और समाज के विकास हेतु विचार साझा किए।

जिला महासमुंद इकाई की सक्रिय उपस्थिति
जिला महासमुंद इकाई की ओर से बड़ी संख्या में पदाधिकारी और सदस्य बैठक में शामिल हुए। इनमें—
आयु. पी.जी. बंसोड (संरक्षक)
आयु. बी.एल. बेलेकर (संरक्षक)
आयु. देवेंद्र मेश्राम (अध्यक्ष)
आयु. बी.पी. मेश्राम (कार्यकारी अध्यक्ष)
आयु. राजेश रामचंद भालेराव (उपाध्यक्ष)
आयु. रतन कामडे
आयु. हंसराज मेश्राम (उपाध्यक्ष)
आयु. व्ही.के. नागदेवे (सलाहकार)
आयु. यशोधरा बंसोड (पूर्व कोषाध्यक्ष)
आयु. सत्यभामा नंदागौरी
सभी पदाधिकारियों का स्वागत किया गया और नव निर्वाचित पदाधिकारियों को बधाई एवं शुभकामनाएँ दी गईं।

पदाधिकारियों के विचार
भंते जी बी. करुणा बोधी जी ने कहा, “त्रिशरण और पंचशील का पालन ही बौद्ध समाज को मजबूती देता है। हमें आचरण से समाज में करुणा और मैत्री का संदेश फैलाना होगा।”
राष्ट्रीय ट्रस्टी आयु. अलका ताई बोरकर ने कहा, “महासमुंद जिला इकाई ने जिस तरह से संगठनात्मक एकता दिखाई है, वह पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा है।”
प्रदेश महासचिव आयु. भोजराज गौरखेड़े ने अपने उद्बोधन में कहा, “डॉ. अंबेडकर के सपनों को साकार करना ही महासभा का मुख्य ध्येय है। शिक्षा और संगठन पर विशेष बल देना होगा।”
जिला अध्यक्ष आयु. देवेंद्र मेश्राम ने कहा, “हमारा संकल्प है कि महासमुंद जिला महासभा समाज के हर वर्ग तक धम्म का प्रकाश पहुँचाएगी।”

संगठन को और सशक्त बनाने का संकल्प
सभा में उपस्थित सभी सदस्यों ने एक स्वर में यह संकल्प दोहराया कि समाज को शिक्षा, संगठन और समता के पथ पर आगे बढ़ाने के लिए लगातार कार्य किया जाएगा। डॉ. अंबेडकर के विचार और बौद्ध धम्म की करुणा, प्रज्ञा व मैत्री की शिक्षाएँ संगठन के हर कार्य का आधार रहेंगी।
बैठक का समापन सामूहिक उद्बोधन और संगठन को और अधिक सक्रिय, जनकल्याणकारी व सामाजिक दृष्टि से सशक्त बनाने के आह्वान के साथ हुआ।