कोरबा, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा 1 जनवरी 2026 से समस्त शासकीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए आधार आधारित ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली अनिवार्य किए जाने के बाद जिले के सभी कार्यालयों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। इस व्यवस्था से कार्यालयीय अनुशासन, पारदर्शिता और समयपालन में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
कलेक्ट्रेट कोरबा में कलेक्टर श्री कुणाल दुदावत स्वयं प्रतिदिन प्रातः 10 बजे से पूर्व ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कर कार्यालय पहुंच रहे हैं। उनके समयपालन का प्रभाव अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है, जिसके चलते अधिकांश कर्मचारी अब समय से पहले कार्यालय पहुंचने लगे हैं।
ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली लागू होने के बाद विभागीय कार्यों में गति आई है। अधिकारियों और कर्मचारियों को कार्यालय आने और जाने, दोनों समय मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से उपस्थिति दर्ज करना अनिवार्य किया गया है। आधार आधारित लोकेशन सिस्टम के चलते उपस्थिति केवल कार्यालय परिसर के आसपास से ही दर्ज हो पा रही है। इससे अनधिकृत अनुपस्थिति, देर से आने और समय से पहले कार्यालय छोड़ने जैसी समस्याओं पर प्रभावी नियंत्रण संभव हुआ है।
इस पारदर्शी व्यवस्था की आम नागरिकों और जनप्रतिनिधियों द्वारा सराहना की जा रही है। पूर्व में कर्मचारियों के समय पर उपस्थित न रहने और अधिकारियों के बिना सूचना के अनुपस्थित रहने की शिकायतें आम थीं, जिनमें अब स्पष्ट कमी देखी जा रही है। इससे कार्यसंस्कृति में सकारात्मक सुधार आया है।

शहर के निवासी परमेश्वर यादव ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की इस पहल को सराहनीय बताते हुए कहा कि यह व्यवस्था पहले ही लागू हो जानी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि अस्पतालों, तहसीलों और स्कूलों में समय पर कर्मचारियों की अनुपस्थिति एक बड़ी समस्या रही है। ऑनलाइन अटेंडेंस से इन व्यवस्थाओं में सुधार आएगा। उन्होंने सभी शासकीय कार्यालयों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने की भी मांग की।
जिला जनसंपर्क अधिकारी श्री कमलज्योति ने बताया कि आधार आधारित ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली समयपालन को बढ़ावा देने के साथ-साथ विभागीय कार्यों की निरंतरता और पारदर्शिता को भी सुदृढ़ कर रही है। उन्होंने कहा कि शासन द्वारा नियुक्त अधिकारियों और कर्मचारियों का दायित्व है कि वे निर्धारित समय पर कार्यालय पहुंचकर आम जनता से जुड़े कार्यों को समय पर पूरा करें।

उन्होंने यह भी कहा कि इस व्यवस्था को और अधिक कड़ाई से लागू किए जाने की आवश्यकता है। बिना ठोस कारण समय पर उपस्थित न रहने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई और वेतन कटौती जैसे प्रावधान लागू किए जाने चाहिए। इससे ईमानदारी से कार्य करने वाले कर्मचारियों को प्रोत्साहन मिलेगा और लापरवाह कर्मचारियों में जवाबदेही की भावना विकसित होगी। विशेष रूप से स्कूलों, अस्पतालों, तहसीलों और जनसंपर्क से जुड़े कार्यालयों में इस व्यवस्था को सख्ती से लागू करने पर उन्होंने बल दिया।
