उप मुख्यमंत्री अरुण साव बोले – कविता से देश और समाज के लिए काम करने की मिलती है प्रेरणा
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और सुप्रसिद्ध कवि स्व. माखनलाल चतुर्वेदी द्वारा रचित कालजयी कविता ‘पुष्प की अभिलाषा’ का आज केंद्रीय जेल बिलासपुर में सामूहिक पाठ हुआ। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री अरुण साव विशेष रूप से शामिल हुए।
कार्यक्रम का आयोजन केंद्रीय जेल प्रशासन द्वारा एक प्रतिष्ठित समाचार पत्र समूह के सहयोग से किया गया था। इस अवसर पर विधायक सुशांत शुक्ला, वरिष्ठ साहित्यकार सतीश जायसवाल, संपादक एवं कवि देवेन्द्र कुमार, जेल प्रशासन के अधिकारी और बड़ी संख्या में कैदी मौजूद थे।
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने स्व. माखनलाल चतुर्वेदी के छायाचित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि इस कविता में त्याग और बलिदान की ऐसी भावना है जो हमें देश और समाज के लिए समर्पण भाव से काम करने की प्रेरणा देती है।

उन्होंने बताया कि स्व. चतुर्वेदी, जिन्हें ‘एक भारतीय आत्मा’ के नाम से जाना जाता है, 5 जुलाई 1921 से 1 मार्च 1922 तक सात माह 27 दिन बिलासपुर केंद्रीय जेल में निरुद्ध रहे। इसी दौरान 18 फरवरी 1922 को उन्होंने यह ऐतिहासिक रचना लिखी थी।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि “एक फूल की इच्छा है कि वह सम्राट अथवा देवता के सिर पर नहीं, बल्कि सेनानियों के पैरों तले कुचला जाए। यही त्याग और बलिदान की भावना हमें देशभक्ति का वास्तविक अर्थ समझाती है।”
उन्होंने बताया कि स्वतंत्रता के बाद स्व. माखनलाल चतुर्वेदी को पहला साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला। उनकी रचनाएँ आज भी पीढ़ियों को देश सेवा और समाज के लिए काम करने की प्रेरणा देती हैं।
इस अवसर पर दीपक सिंह, मोहित जायसवाल और जेल अधीक्षक खोमेश मंडावी भी उपस्थित रहे।