राज्य के वन क्षेत्रों में अवैध शिकार एवं वन अपराधों की रोकथाम के लिए वन विभाग द्वारा लगातार कार्रवाई की जा रही है। हालांकि कई मामलों में अपराधी पकड़े जाते हैं, लेकिन कानूनी प्रावधानों की समुचित जानकारी के अभाव में कभी-कभी मजबूत प्रकरण तैयार नहीं हो पाता, जिससे अपराधियों को लाभ मिल जाता है। ऐसी स्थिति से बचने और प्रभावी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने के उद्देश्य से वन विभाग द्वारा विधिक साक्षरता प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
वन मंत्री श्री केदार कश्यप के नेतृत्व एवं प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) श्री अरुण कुमार पाण्डेय के निर्देशानुसार प्रदेशभर में वन विभाग के कर्मचारियों के लिए विधिक साक्षरता कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं। इसी क्रम में दिसंबर माह में वनमण्डल कार्यालय दुर्ग के सभागार में “प्रोटेक्ट टुडे एंड सिक्योर टुमारो” परियोजना के अंतर्गत एक दिवसीय विधिक साक्षरता कार्यशाला एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
यह कार्यक्रम जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) के सहयोग से संपन्न हुआ, जिसमें जिला न्यायालय दुर्ग के काउंसलर श्री चंद्राकर ने मुख्य वक्ता के रूप में वन एवं वन्यजीव संरक्षण से संबंधित महत्वपूर्ण कानूनी जानकारियां प्रदान कीं। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य वनकर्मियों को वन कानूनों, नियमों और धाराओं की स्पष्ट समझ देना है, ताकि वन एवं वन्यजीव अपराधों से जुड़े मामलों को मजबूत बनाया जा सके और अपराधियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सके।
कार्यक्रम के दौरान भारतीय वन अधिनियम, 1927 तथा वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के प्रमुख प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों द्वारा आरक्षित एवं संरक्षित वनों से संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं, विभागीय कार्रवाई की विधियों तथा राजस्व क्षेत्रों में होने वाले वन अपराधों की रोकथाम एवं नियंत्रण के उपायों को सरल भाषा में समझाया गया।
प्रशिक्षण के एक विशेष सत्र में नालसा के विशेषज्ञों ने अदालती मामलों के प्रबंधन से जुड़े “क्या करें और क्या न करें” विषय पर व्यावहारिक सुझाव दिए, जिससे वनकर्मी विधिक प्रक्रियाओं का सही ढंग से पालन कर सकें। इस अवसर पर वन परिक्षेत्र अधिकारी दुर्ग एवं धमधा सहित वनमण्डल के समस्त कार्यपालिक एवं क्षेत्रीय अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे, जिन्हें वन्यजीव एवं वन संपदा की सुरक्षा के लिए विधिक रूप से अधिक सजग और सक्षम बनाए जाने पर बल दिया गया।
