मत्स्य बीज उत्पादन में छत्तीसगढ़ देश में 6वें स्थान पर
विश्व मात्स्यिकी दिवस पर कृषक संगोष्ठी आयोजित
कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा मछलीपालन मंत्री श्री रामविचार नेताम ने कहा कि मत्स्य किसानों की आर्थिक समृद्धि के लिए नवीन तकनीक, बेहतर कौशल विकास और आर्थिक प्रोत्साहन की आवश्यकता है। वह शुक्रवार को इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय परिसर स्थित कृषि मंडपम सभागार में आयोजित विश्व मात्स्यिकी दिवस के अवसर पर एक दिवसीय मत्स्य कृषक संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे।
मंत्री नेताम ने कहा कि प्रतिवर्ष 21 नवंबर को विश्व मात्स्यिकी दिवस का आयोजन मत्स्य पालन के महत्व, मछुआ समुदाय के अधिकारों, जीविका, खाद्य सुरक्षा एवं सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागरूकता लाने के उद्देश्य से किया जाता है। उन्होंने बताया कि मछली पालन के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ राज्य को प्राकृतिक संसाधनों का विशाल आधार प्राप्त है, जिसे वैज्ञानिक पद्धति और नई तकनीकों के माध्यम से और अधिक विकसित किया जा सकता है।
मत्स्य बीज उत्पादन में राज्य देश में 6वें स्थान पर
मंत्री नेताम ने बताया कि राज्य निर्माण के बाद से ही नील कांति, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना सहित अन्य प्रमुख योजनाओं के माध्यम से मछली पालन के विस्तार पर लगातार कार्य किया जा रहा है।
राज्य में वर्तमान में 1,30,001 जल स्त्रोत (2.039 लाख हेक्टेयर) उपलब्ध हैं, जिनमें से 98% में किसी न किसी रूप में मत्स्य पालन किया जा रहा है। राज्य में 3571 किलोमीटर नदीय जलक्षेत्र भी उपलब्ध है।
सघन मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए अब तक 7580 हेक्टेयर अतिरिक्त जलक्षेत्र निजी क्षेत्र में विकसित किया गया है।
राज्य में गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज उत्पादन के लिए 82 नवीन हैचरी स्थापित की गई हैं। कुल 120 हैचरियों के माध्यम से प्रतिवर्ष 583 करोड़ मत्स्य बीज उत्पादित किया जा रहा है, जिससे छत्तीसगढ़ देश में छठवें स्थान पर पहुंच गया है। राज्य अब मत्स्य बीज उत्पादन में आत्मनिर्भर होने के साथ अन्य राज्यों को निर्यात भी कर रहा है।
रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर और जांजगीर में थोक मत्स्य बाजार
बाजार व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने और उपभोक्ताओं तक ताजी मछली पहुंचाने के उद्देश्य से विभाग ने बड़े पैमाने पर ढांचागत सुविधाओं का विकास किया है। इसके तहत
- 1008 मोटरसाइकिल
- आईस बॉक्स
- 10 थ्री-व्हीलर,
- 05 इन्सुलेटेड ट्रक
- 114 वाहन (लाइव फिश वेडिंग सेंटर)
वितरित किए गए हैं।
साथ ही रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर एवं जांजगीर में थोक मत्स्य बाजार स्थापित किए गए हैं। कार्यक्रम के दौरान मंत्री नेताम ने हितग्राहियों को लाभांश राशि के चेक भी प्रदान किए।
मत्स्य पालन—ग्रामीण बेरोजगारी दूर करने का सशक्त माध्यम
कार्यक्रम को छत्तीसगढ़ राज्य मछुआ बोर्ड के अध्यक्ष श्री भरत मटियारा और रायपुर ग्रामीण विधायक श्री मोतीलाल साहू ने भी संबोधित किया।
विभाग के संचालक श्री एम.एस. नाग ने बताया कि प्रदेश में मत्स्य पालन तेजी से प्रगति कर रहा है। राज्य में 1840 प्राथमिक मत्स्य सहकारी समितियों के माध्यम से 63,280 सदस्य मत्स्य पालन कार्य में जुड़े हैं।
उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक आधारित प्रशिक्षण लगातार दिया जा रहा है, जिससे मत्स्य पालन ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार का महत्वपूर्ण साधन बन रहा है।
संगोष्ठी में मछुआ कल्याण बोर्ड के उपाध्यक्ष डॉ. लखन लाल धीवर, पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष श्री नेहरू निषाद, मछुआ कल्याण बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष श्री बसंत तारख, श्री रामकृष्ण धीवर सहित बड़ी संख्या में मत्स्य किसान उपस्थित थे।
