सस्ती भी, असरदार भी: पांच साल में चार गुना बढ़ी जेनेरिक दवाओं की खपत
जेनेरिक दवाओं का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। इन दवाओं ने न केवल आम जनता की जेब पर बोझ कम किया है, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं में भी बड़ा बदलाव लाया है।
पिछले पांच वर्षों में जेनेरिक दवाओं की खपत में चार गुना इज़ाफा हुआ है। यह न केवल सरकार की ‘जन औषधि योजना’ और जागरूकता अभियानों की सफलता को दर्शाता है, बल्कि लोगों में जेनेरिक दवाओं के प्रति विश्वास को भी बढ़ावा देता है।
जेनेरिक दवाओं की खासियत:
- कीमत में कमी: ब्रांडेड दवाओं की तुलना में ये 50% से 90% तक सस्ती होती हैं।
- समान गुणवत्ता: इनके प्रभाव और गुणवत्ता में ब्रांडेड दवाओं से कोई फर्क नहीं होता।
- सुलभता: जन औषधि केंद्रों और फार्मेसी के माध्यम से ये आसानी से उपलब्ध हैं।
आंकड़ों में वृद्धि:
एक रिपोर्ट के अनुसार, 2018 में जहां केवल 20% लोग जेनेरिक दवाओं का इस्तेमाल करते थे, वहीं 2023 में यह आंकड़ा 80% तक पहुंच गया है।
सरकार की भूमिका:
- प्रधानमंत्री जन औषधि योजना (PMBJP): इस योजना के तहत देशभर में 9,500 से अधिक जन औषधि केंद्र खोले गए हैं।
- जागरूकता अभियान: डॉक्टर्स और फार्मासिस्ट को जेनेरिक दवाओं के प्रति प्रोत्साहित किया जा रहा है।
चुनौतियां:
हालांकि, जेनेरिक दवाओं को लेकर अभी भी कुछ लोग संदेह में हैं। बेहतर जागरूकता और गुणवत्तापूर्ण सप्लाई चैन की जरूरत है।
निष्कर्ष:
जेनेरिक दवाओं का बढ़ता उपयोग न केवल एक सस्ती स्वास्थ्य सेवा का संकेत है, बल्कि यह भारत को स्वास्थ्य क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की ओर भी ले जा रहा है। अब समय है कि आम लोग इनका और अधिक लाभ उठाएं और स्वस्थ जीवन को अपनाएं।
