अम्बिकापुर : प्लास्टिक कचरे के प्रबंधन में प्रदेश का दूसरा और सरगुजा संभाग का पहला जिला स्तरीय प्लास्टिक प्रोसेसिंग केन्द्र का शुभारंभ
स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत सरगुजा जिले ने ठोस एवं प्लास्टिक कचरे के वैज्ञानिक और व्यवस्थित प्रबंधन में एक और उपलब्धि दर्ज की है। अम्बिकापुर विकासखण्ड के ग्राम पंचायत दरिमा में जिला स्तरीय प्लास्टिक प्रोसेसिंग इकाई (एम.आर.एफ. यूनिट) की स्थापना की गई है। यह केन्द्र प्रदेश का दूसरा और सरगुजा संभाग का पहला प्लास्टिक प्रोसेसिंग केन्द्र है।
इसका शुभारंभ लूण्ड्रा विधायक प्रबोध मिंज ने किया। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती निरूपा सिंह, उपाध्यक्ष श्री देवनारायण यादव, सदस्य श्रीमती अनिमा केरकेट्टा, अम्बिकापुर जनपद पंचायत उपाध्यक्ष श्री सतीश यादव, जनपद सदस्य श्रीमती प्रसुन्न सिंह, बड़ी संख्या में ग्रामीणजन, जिला पंचायत सीईओ श्री विनय कुमार अग्रवाल एवं प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।
महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल
विधायक श्री मिंज ने कहा कि स्वच्छता प्रबंधन में सरगुजा जिला आज पूरे प्रदेश के लिए रोल मॉडल बन रहा है। यह केन्द्र पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण आजीविका संवर्धन का उत्कृष्ट उदाहरण बनेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि यह पहल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करेगी।
जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती निरूपा सिंह ने कहा कि प्लास्टिक कचरे की समस्या अब केवल शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि गांवों में भी बड़ी चुनौती बन चुकी है। इस केन्द्र के संचालन से जिले की 569 ग्राम पंचायतों की लगभग 2500 स्वच्छाग्राही दीदियों को आर्थिक लाभ मिलेगा।
प्रतिमाह 7500 रुपये मानदेय पर रोजगार
जिला पंचायत सीईओ श्री विनय कुमार अग्रवाल ने कहा कि प्लास्टिक प्रदूषण एक गंभीर वैश्विक चुनौती है। जिले की यह पहल प्रधानमंत्री के “स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत” संकल्प को मजबूती देगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा प्रदान करेगी। उन्होंने बताया कि एम.आर.एफ. यूनिट से 569 ग्राम पंचायतों की 2500 दीदियों को प्लास्टिक कचरे के विक्रय से सीधा लाभ होगा। वहीं, प्लांट में कार्यरत 30-35 महिलाओं को प्रतिमाह 7500 रुपये मानदेय पर रोजगार का अवसर मिलेगा।
पुनर्चक्रण से बनेगा नया सामान
गौरतलब है कि इस यूनिट के माध्यम से ग्रामों से एकत्रित सूखा एवं ठोस कचरे को प्रोसेसिंग के लिए भेजा जाएगा। यहां प्लास्टिक का पुनर्चक्रण कर दाने, गट्टे और अन्य उत्पाद तैयार किए जाएंगे। वर्तमान में प्लास्टिक दानों से रस्सी निर्माण शुरू हो चुका है, जबकि जल्द ही प्लास्टिक बाल्टी और डस्टबिन बनाने का कार्य भी प्रारंभ होगा।
जिले के सभी 569 सेग्रीगेशन शेड एवं 7 प्लास्टिक प्रबंधन केन्द्रों को इस जिला स्तरीय इकाई से जोड़ा गया है। प्रभावी संचालन हेतु 10-12 ग्रामों के क्लस्टर बनाकर जिम्मेदारी जिला, जनपद एवं पंचायत स्तरीय अमलों को सौंपी गई है। साथ ही, कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करने नियमित मॉनिटरिंग और फॉलोअप की व्यवस्था की गई है।