राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कहा कि भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) का देश के लोकतांत्रिक ढांचे में अत्यंत महत्वपूर्ण और सर्वोच्च स्थान है। वे आज महालेखाकार कार्यालय के आवासीय परिसर स्थित सामुदायिक भवन में आयोजित ऑडिट पखवाड़ा 2025 के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
लेखा परीक्षा: पारदर्शिता और उत्तरदायित्व का आधार स्तम्भ
अपने उद्बोधन में राज्यपाल ने कहा कि लेखा परीक्षा केवल सरकारी व्यय या राजस्व की जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक पारदर्शिता, वित्तीय अनुशासन और जवाबदेही सुनिश्चित करने का एक प्रभावी माध्यम है।
उन्होंने बताया कि भारतीय लेखा एवं लेखा परीक्षा विभाग का गौरवशाली इतिहास 1858 में ब्रिटिश शासनकाल में प्रारंभ हुई व्यवस्था से जुड़ा है। स्वतंत्रता के बाद संविधान निर्माताओं ने इसकी महत्ता को मान्यता देते हुए इसे संवैधानिक प्राधिकरण का दर्जा प्रदान किया।
तेजी से बढ़ते डिजिटल युग में कैग की भूमिका और महत्वपूर्ण
राज्यपाल ने कहा कि डिजिटल प्रशासन के दौर में कैग की जिम्मेदारियां और बढ़ गई हैं। यह संस्था केवल कमियों की पहचान तक सीमित नहीं रहती, बल्कि प्रशासनिक सुधार, नवाचार और पारदर्शिता को बढ़ावा भी देती है।
उन्होंने कहा कि विभाग की निष्पक्षता और कर्मठता ने इसे एक सशक्त संस्थान के रूप में स्थापित किया है, जो भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
अधिकारियों की ईमानदारी से जनता का भरोसा मजबूत होगा
राज्यपाल श्री डेका ने विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों से आग्रह किया कि वे निष्ठा और प्रतिबद्धता के साथ कार्य करते हुए संस्था की गरिमा को बनाए रखें।
उन्होंने कहा, “जीवन में एक ऐसा कार्य अवश्य करें जिसमें लेने का नहीं, बल्कि देने का भाव हो। यही भावना देश को 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य तक पहुंचाने में मदद करेगी।”
कार्यक्रम में वृक्षारोपण भी
इस अवसर पर प्रधान महालेखाकार श्री यशवंत कुमार ने स्वागत भाषण दिया और कार्यक्रम के अंत में महालेखाकार (लेखा परीक्षा) श्री मोहम्मद फैजान ने आभार व्यक्त किया।
राज्यपाल ने सामुदायिक भवन परिसर में वृक्षारोपण भी किया। कार्यक्रम में महालेखाकार कार्यालय के अधिकारी एवं कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
