सचिव खनिज संसाधन विभाग, श्री पी. दयानंद ने बताया कि प्रदेश में 28 से अधिक प्रकार के खनिज पाए जाते हैं। राज्य सरकार ने इन खनिजों के अन्वेषण और खनन के लिए विशेष खनिज ब्लॉकों की नीलामी और अन्य माध्यम से उपलब्धता सुनिश्चित की है, जिससे पिछले दो वर्षों में खनिज राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (CMDC) द्वारा टिन, बाक्साइट, लौह अयस्क, कॉपर, हीरा, मैंगनीज, कोरंडम, डोलोमाइट और कोयला सहित 9 खनिजों के खनन और मार्केटिंग का कार्य किया जा रहा है। विशेष रूप से टिन खनिज के मामले में अनुसूचित जनजातियों को उचित मूल्य सुनिश्चित किया गया है, जिससे खरीदी दर ₹1926 प्रति किलोग्राम तक पहुंची है। इसके साथ ही TIN Portal (Tribal Incentive for Natural Resources) के माध्यम से ऑनलाइन भुगतान की सुविधा भी शुरू की जा रही है।
सी.एम.डी.सी. ने क्रिटिकल मिनरल जैसे मैंगनीज और ग्रेफाइट के अन्वेषण में उत्साहजनक परिणाम प्राप्त किए हैं। इसके अलावा, कोल इंडिया लिमिटेड के साथ संयुक्त उपक्रम में क्रिटिकल मिनरल के खनन और प्रसंस्करण में राज्य की भागीदारी बढ़ रही है। इससे रोजगार सृजन और कौशल विकास के अवसर भी बढ़ेंगे।
राज्य में पारदर्शी नीलामी और तकनीक-सक्षम प्रक्रिया के माध्यम से लौह अयस्क की बिक्री में रिकॉर्ड मूल्य प्राप्त हुआ। पिछले वित्तीय वर्ष में आरीडोंगरी खदान से 28.65 करोड़ रुपये राज्य को राजस्व के रूप में और 24 करोड़ रुपये CMDC को शुद्ध लाभ के रूप में प्राप्त हुए। CMDC की खदानों से स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार प्राप्त हो रहा है।
सी.एम.डी.सी. और NMDC के संयुक्त उपक्रम से बैलाडिला खदानों में 2026 में उत्पादन शुरू होने की तैयारी है। इससे राज्य को लगभग 7 हजार करोड़ रुपये और CMDC को 3 हजार करोड़ रुपये राजस्व की प्राप्ति होगी। इसके अलावा हीरा, डोलोमाइट, कोरंडम, कॉपर और बाक्साइट खनिजों के विकास और प्रसंस्करण में भी CMDC सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
सचिव ने बताया कि भविष्य की योजनाओं में टिन स्लैग, एल्यूमिनियम स्लैग और अन्य क्षेत्रों से क्रिटिकल मिनरल का निष्कर्षण, डोलोमाइट उत्पादन में वृद्धि, ड्रोन तकनीक और बंद खदानों के पुनरुद्धार जैसे कई नए प्रोजेक्ट शामिल हैं। इन सभी पहलों से छत्तीसगढ़ में खनिज क्षेत्र में राजस्व वृद्धि, रोजगार और स्थानीय उद्योगों के विकास की उम्मीद है।
