नई दिल्ली। देशभर में त्योहारी सीजन शुरू होने से पहले ही बाजारों में सुस्ती छा गई है। कार, SUV, टीवी, मोबाइल और एसी जैसे बड़े उत्पादों की बिक्री थम सी गई है। वजह है – जीएसटी (GST) में संभावित कटौती की उम्मीद। ग्राहक इस उम्मीद में खरीदारी टाल रहे हैं कि जीएसटी दर घटने के बाद कीमतें कम हो जाएंगी।
ऑटोमोबाइल डीलरों और इलेक्ट्रॉनिक कंपनियों का कहना है कि स्टॉक भरा पड़ा है, लेकिन बिक्री रुक जाने से इन्वेंट्री फाइनेंसिंग का बोझ लगातार बढ़ रहा है। डीलरों को डर है कि अगर 60 दिनों के भीतर माल नहीं बिका तो बैंक ऊंची ब्याज दर और पेनाल्टी वसूल सकते हैं।
इसी तरह, एलजी, सैमसंग और सोनी जैसी कंपनियाँ भी टीवी, फ्रिज और एसी जैसे प्रोडक्ट्स की मांग में भारी गिरावट महसूस कर रही हैं। कई ग्राहकों ने तो कारों की बुकिंग तक कैंसिल कर दी है।
क्या बदल सकता है टैक्स ढांचा?
जीएसटी परिषद 3–4 सितंबर को बैठक करने जा रही है, जिसमें चार दरों (5%, 12%, 18% और 28%) को घटाकर सिर्फ दो दरें करने पर चर्चा होगी।
- 5%: ज़रूरी और मेरिट श्रेणी के सामान पर
- 18%: अधिकांश सामान्य वस्तुओं और सेवाओं पर
इसके अलावा कुछ लक्ज़री और नुकसानदेह वस्तुओं पर 40% का विशेष टैक्स लगाने का प्रस्ताव है।
अगर यह बदलाव लागू होता है तो कार, टू-व्हीलर, टीवी, एसी और डिशवॉशर जैसे उत्पाद सस्ते हो जाएंगे।
व्यापारियों और सरकार की चिंता
त्योहारी सीजन आमतौर पर रिटेल और ऑटो सेक्टर के लिए सबसे बड़ा बिज़नेस टाइम होता है, लेकिन इस बार ‘वेट एंड वॉच’ की स्थिति ने बाजार को ठंडा कर दिया है। व्यापारियों का कहना है कि मांग ठप है, जबकि स्टॉक गोदामों में भरा पड़ा है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि जीएसटी कटौती दीर्घकालिक रूप से उपभोक्ताओं और उद्योग के लिए फायदेमंद होगी, लेकिन फिलहाल इससे बाजार में अनिश्चितता और सुस्ती आ गई है।
मोदी सरकार का वादा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर ऐलान किया था कि दिवाली तक जीएसटी संरचना को सरल और न्यायसंगत बनाया जाएगा। अगर परिषद में फैसला हो गया तो उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलेगी और सरकार का ‘ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस’ एजेंडा भी मजबूत होगा।
फिलहाल, बाजार की रौनक पूरी तरह सरकार के टैक्स फैसले पर टिकी है। ग्राहक इंतजार में हैं और दुकानदार चिंता में।