गैस माइग्रेशन विवाद: पेट्रोलियम मंत्रालय ने 2.81 बिलियन डॉलर की उठाई मांग, Reliance Industries का आया बयान
नई दिल्ली: पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने गैस माइग्रेशन विवाद मामले में Reliance Industries (RIL) से 2.81 बिलियन डॉलर की मांग की है। मंत्रालय का दावा है कि रिलायंस ने अपने केजी-डी6 ब्लॉक से जुड़ी ओएनजीसी (ONGC) की गैस को अवैध रूप से निकालकर उसका व्यावसायिक लाभ उठाया। इस मामले में मंत्रालय ने एक वित्तीय नोटिस जारी किया है।
Reliance Industries का जवाब
Reliance Industries ने सरकार की इस मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह इस मामले में पहले ही अपने पक्ष को स्पष्ट कर चुकी है और सभी अनुबंधों के तहत काम कर रही है। कंपनी ने यह भी कहा कि यह विवाद लंबी कानूनी प्रक्रिया से गुजर रहा है और इस पर अंतिम फैसला न्यायालय के अधीन है।
क्या है गैस माइग्रेशन विवाद?
गैस माइग्रेशन विवाद 2015 से चर्चा में है, जब ओएनजीसी ने रिलायंस पर आरोप लगाया था कि उसने कृष्णा-गोदावरी बेसिन केजी-डी6 ब्लॉक से उसके ब्लॉक की गैस का अवैध रूप से उत्पादन किया। इस मामले की जांच डिर्पा (DGH) द्वारा कराई गई थी, जिसमें बताया गया कि ONGC की गैस RIL के ब्लॉक में माइग्रेट हो गई थी। इस पर सरकार ने जुर्माना लगाने का प्रस्ताव रखा था।
क्या होगा आगे?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सरकार की यह मांग आगे बढ़ती है तो यह रिलायंस के लिए एक बड़ी वित्तीय चुनौती बन सकती है। हालांकि, कंपनी का कहना है कि वह कानूनी और नियामक प्रक्रियाओं का पालन कर रही है।
अब देखना होगा कि इस विवाद का अंतिम समाधान क्या निकलता है और सरकार तथा रिलायंस के बीच बातचीत से कोई रास्ता निकलता है या नहीं।