डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना की शक्ति एआई के साथ उपयोग करने पर हो जाती है 100 गुना: अश्विनी वैष्णव
नई दिल्ली: केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी और संचार मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) की ताकत तब कई गुना बढ़ जाती है जब इसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के साथ जोड़ा जाता है। उन्होंने कहा कि भारत की डिजिटल संरचना पहले ही दुनिया में एक मिसाल बन चुकी है और एआई के साथ इसके प्रभाव को 100 गुना तक बढ़ाया जा सकता है।
डिजिटल क्रांति में भारत की अग्रणी भूमिका
वैष्णव ने इस दौरान आधार, यूपीआई और डिजिलॉकर जैसी डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना का उदाहरण दिया, जो सार्वजनिक सेवाओं को सुगम और पारदर्शी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि अब अगला कदम इन प्रणालियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस करना है, जिससे निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज होगी और सेवाएं अधिक प्रभावी बनेंगी।
एआई के साथ DPI का तालमेल
मंत्री ने बताया कि एआई का उपयोग भाषा अनुवाद, चिकित्सा सेवाओं, वित्तीय समावेशन, स्मार्ट गवर्नेंस और अन्य क्षेत्रों में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार इस दिशा में काम कर रही है ताकि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को और अधिक सक्षम बनाया जा सके।
वैश्विक स्तर पर भारत की पहचान
अश्विनी वैष्णव ने यह भी कहा कि भारत की डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को अब दुनिया भर के देश अपनाने लगे हैं और यह साबित करता है कि भारत डिजिटल इनोवेशन में एक लीडर बनकर उभर रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में, एआई और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का मिलाजुला प्रभाव अर्थव्यवस्था और प्रशासन दोनों में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा।
सरकार की अगली योजना
मंत्री ने संकेत दिया कि सरकार “AI For All” अभियान के तहत एआई-आधारित डिजिटल सेवाओं को बड़े पैमाने पर लागू करने की योजना बना रही है, जिससे हर नागरिक तक टेक्नोलॉजी की पहुंच सुनिश्चित हो सके।
निष्कर्ष: भारत की डिजिटल अवसंरचना पहले ही वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना चुकी है और अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के साथ यह और भी प्रभावी हो जाएगी। इससे न केवल सरकारी सेवाओं में सुधार होगा, बल्कि आम नागरिकों को भी अत्याधुनिक डिजिटल सुविधाओं का लाभ मिलेगा।