नई दिल्ली : आज हम जहाँ भी नजर डालें, दुकान, पेट्रोल पंप, कैफे या सोशल मीडिया, हर जगह QR कोड हमारी जिंदगी का हिस्सा बना हुआ है। एक स्कैन और सारा काम मिनटों में हो जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह छोटा सा ब्लैक एंड व्हाइट ग्रिड आखिर आया कहाँ से? इसकी शुरुआत कैसे हुई और कैसे यह दुनिया भर में डिजिटल क्रांति का प्रतीक बन गया?
1994: जापान में जन्मा QR कोड
QR कोड यानी Quick Response Code का अविष्कार 1994 में जापान के इंजीनियर मासाहिरो हारा ने किया था। वह उस समय Denso Wave नामक कंपनी में कार्यरत थे, जो टोयोटा की एक सहायक कंपनी है। हारा ने ऐसा कोड डिज़ाइन किया, जिसे तेजी से स्कैन किया जा सके और जो सामान्य बारकोड की तुलना में कहीं अधिक जानकारी स्टोर कर सके।

‘गो’ गेम बना प्रेरणा स्रोत
मासाहिरो हारा को इस कोड का विचार जापान के पारंपरिक ‘गो’ गेम से आया, जिसमें 19×19 का ग्रिड होता है और काले-सफेद पत्थरों से पैटर्न बनाए जाते हैं। यह खेल उन्हें यह सोचने के लिए प्रेरित करता रहा कि कैसे इसी तरह की ग्रिड संरचना में डिजिटल जानकारियों को कोड किया जा सकता है। यह सोच ही QR कोड की नींव बन गई।
ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री से टेक्नोलॉजी की दुनिया तक
शुरुआत में QR कोड का उपयोग केवल टोयोटा द्वारा ऑटोमोबाइल पार्ट्स की ट्रैकिंग के लिए किया गया था। लेकिन इसकी सटीकता और गति को देखकर यह तकनीक जल्द ही फैक्ट्री की दीवारों से निकलकर मोबाइल पेमेंट, डिलीवरी ट्रैकिंग, वेबसाइट लिंकिंग, टिकट स्कैनिंग और सोशल मीडिया लॉगइन तक फैल गई।

QR कोड: एक स्कैन में सारी जानकारी
QR कोड की लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण है इसकी स्पीड और सरलता। हर कोड यूनिक होता है और इसे किसी भी स्मार्टफोन से आसानी से स्कैन किया जा सकता है। आज चाहे UPI पेमेंट करना हो, WhatsApp Web लॉगइन करना हो या रेस्टोरेंट का मेन्यू देखना हो, QR कोड सब कुछ चुटकियों में आसान बना देता है।
“मैंने कभी नहीं सोचा था कि यह कोड इतना बड़ा बन जाएगा” – मासाहिरो हारा
QR कोड के आविष्कारक मासाहिरो हारा खुद कहते हैं कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि उनका बनाया यह ग्रिड सिस्टम एक दिन पूरी दुनिया के डिजिटल व्यवहार का आधार बन जाएगा। आज QR कोड टेक्नोलॉजी, बिज़नेस और आम आदमी – सभी की जरूरत बन चुका है।

एक छोटे से कोड का बड़ा सफर
QR कोड सिर्फ तकनीक नहीं है, यह रचनात्मक सोच, नवाचार और जरूरत का एक आदर्श उदाहरण है। जापान के एक साधारण बोर्ड गेम से प्रेरित होकर बना यह कोड आज दुनिया की डिजिटल पहचान बन गया है।