प्रसिद्ध फिल्म निर्माता अनुराग कश्यप ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण घोषणा की, जिसमें उन्होंने मुंबई छोड़ने और दक्षिण भारतीय फिल्म उद्योग की ओर रुख करने की योजना का खुलासा किया। उनका कहना है कि हिंदी फिल्म उद्योग में बढ़ती व्यावसायिक चुनौतियों और रचनात्मक स्वतंत्रता की कमी के कारण वह इस दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं।
अनुराग कश्यप ने इस बात पर जोर दिया कि फिल्म निर्माण अब पहले जैसा आनंददायक नहीं रहा। उन्होंने कहा कि आजकल फिल्म बनाने से पहले ही यह तय हो जाता है कि इसे किस तरह बेचा जाएगा, जिससे उनकी रचनात्मकता और स्वतंत्रता पर असर पड़ा है। इसके साथ ही उन्होंने टैलेंट मैनेजमेंट एजेंसियों पर भी आरोप लगाया, जो उभरते कलाकारों को स्टार बनाने की बजाय उन्हें ग्लैमर की ओर धकेलती हैं।
कश्यप ने यह भी कहा कि हिंदी सिनेमा में मौलिकता की कमी हो गई है, और रीमेक पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है। उनका मानना है कि अब कोई भी नए विचार के साथ फिल्म बनाने की कोशिश नहीं करता, जबकि दक्षिण भारतीय फिल्म उद्योग में उन्हें रचनात्मक स्वतंत्रता और प्रेरणा मिलने की उम्मीद है।
यह कदम कश्यप के लिए एक नई शुरुआत का प्रतीक हो सकता है, क्योंकि वह अपनी फिल्मों में हमेशा अनूठे और साहसिक विचारों के लिए पहचाने जाते हैं। अब सभी की नजरें इस बात पर होंगी कि उनका दक्षिण भारतीय सिनेमा में योगदान कितना प्रभावशाली रहेगा।