अपनी कॉमिक टाइमिंग से दर्शकों को बरसों तक हंसाने वाले अभिनेता राजपाल यादव गुरुवार को बेहद भावुक नजर आए। करीब 2.5 करोड़ रुपये के चेक बाउंस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट से कोई राहत न मिलने के बाद उन्होंने तिहाड़ जेल में सरेंडर कर दिया। जेल जाने से ठीक पहले उनके शब्दों ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया।
राजपाल यादव की यह कानूनी लड़ाई उनकी 2010 में निर्देशित फिल्म ‘अता पता लापता’ से जुड़ी है। दिल्ली हाई कोर्ट ने फंड का इंतज़ाम करने के लिए और समय देने की उनकी अंतिम याचिका खारिज कर दी थी, जिसके कुछ ही घंटों बाद अभिनेता ने सज़ा भुगतने के लिए आत्मसमर्पण कर दिया।
बताया जा रहा है कि सरेंडर से कुछ पल पहले राजपाल यादव बेहद भावुक हो गए। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने कहा,
“मेरे पास पैसे नहीं हैं… कोई और रास्ता नहीं दिख रहा। यहां इंसान बिल्कुल अकेला हो जाता है, इस मुश्किल से मुझे खुद ही निपटना होगा।”
उनके ये शब्द इस लंबे कानूनी संघर्ष और मानसिक दबाव की गहराई को दर्शाते हैं।
क्या है पूरा मामला
यह विवाद वर्ष 2010 का है, जब राजपाल यादव ने अपनी फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से करीब 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। फिल्म के बॉक्स ऑफिस पर असफल होने के बाद आर्थिक संकट गहराता चला गया और भुगतान के लिए दिए गए कई चेक बाउंस हो गए।
इसके बाद नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत मामला दर्ज हुआ। अप्रैल 2018 में एक मजिस्ट्रेट कोर्ट ने राजपाल यादव और उनकी पत्नी को दोषी ठहराते हुए छह महीने की सज़ा सुनाई थी। अभिनेता ने फैसले के खिलाफ कई अपीलें कीं, लेकिन वर्षों तक मामला लंबित रहने के बावजूद कोई अंतिम राहत नहीं मिली।
कोर्ट के अनुसार, आंशिक भुगतान के बावजूद बकाया राशि बढ़कर लगभग 9 करोड़ रुपये तक पहुंच गई थी। फरवरी 2026 में हाई कोर्ट ने यह कहते हुए और समय देने से इनकार कर दिया कि सार्वजनिक पहचान होने के बावजूद बार-बार नरमी नहीं बरती जा सकती।
तिहाड़ जेल में किया सरेंडर
कोर्ट के आदेश के बाद राजपाल यादव ने गुरुवार शाम करीब 4 बजे तिहाड़ जेल पहुंचकर अपनी छह महीने की सज़ा काटने के लिए सरेंडर कर दिया। कोर्ट में पहले से जमा कराई गई रकम शिकायतकर्ता कंपनी को जारी कर दी गई है।
यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि चमक-दमक की दुनिया के पीछे कलाकार किन कठिन हालात से गुजरते हैं, जहां एक फिल्म की असफलता जीवन की दिशा ही बदल सकती है।
