नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) वर्ष 2026 की शुरुआत एक अत्यंत महत्वपूर्ण और बहुप्रतीक्षित अंतरिक्ष मिशन के साथ करने जा रहा है। 12 जनवरी 2026 को सुबह 10:17 बजे, श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के पहले लॉन्च पैड से PSLV-C62 रॉकेट का प्रक्षेपण किया जाएगा। यह इसरो का 101वां ऑर्बिटल मिशन होगा, जिसे राष्ट्रीय सुरक्षा, निगरानी और उन्नत अंतरिक्ष तकनीक के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
EOS-N1 सैटेलाइट से मिलेगी रणनीतिक बढ़त
इस मिशन का मुख्य पेलोड EOS-N1 है, जिसे ‘अन्वेषा’ भी कहा जाता है। इसे रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने देश की रणनीतिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विकसित किया है। EOS-N1 एक अत्याधुनिक हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग सैटेलाइट है, जो सैकड़ों तरंगदैर्घ्यों का विश्लेषण करने में सक्षम है।
इस उपग्रह की मदद से सीमावर्ती इलाकों में संदिग्ध गतिविधियों, घुसपैठ, छिपे टैंकों और सैन्य हलचलों की सटीक पहचान संभव होगी। करीब 600 किलोमीटर की ऊंचाई से यह सैटेलाइट लगातार निगरानी करेगा। इसके साथ-साथ इसका उपयोग कृषि निगरानी, फसल आकलन, पर्यावरण अध्ययन और प्राकृतिक संसाधनों की मैपिंग में भी किया जाएगा।
एक साथ जाएंगे 19 सैटेलाइट
PSLV-C62 मिशन के तहत कुल 19 सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में स्थापित किया जाएगा। इनमें भारत के अलावा स्पेन, मॉरीशस, लक्जमबर्ग, यूएई, सिंगापुर, यूरोप और अमेरिका के स्टार्टअप्स व शोध संस्थानों के पेलोड शामिल हैं।
इस मिशन का एक खास आकर्षण स्पेन के स्टार्टअप द्वारा विकसित ‘केस्ट्रेल इनिशियल डेमोंस्ट्रेटर’ है, जो री-एंट्री (पुनः वायुमंडल में प्रवेश) तकनीक का परीक्षण करेगा।
भविष्य की तकनीकों की होगी परीक्षा
इसके अलावा, बेंगलुरु के एक स्टार्टअप द्वारा विकसित ऑन-ऑर्बिट रिफ्यूलिंग प्रयोग और एआई आधारित छोटे सैटेलाइट्स भी इस मिशन का हिस्सा होंगे। ये प्रयोग भविष्य की अंतरिक्ष तकनीकों जैसे सैटेलाइट सर्विसिंग, लंबी अवधि के मिशन और स्वायत्त सिस्टम की दिशा में बड़ा कदम माने जा रहे हैं।
कुल मिलाकर, ISRO का यह मिशन न सिर्फ राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि कृषि, पर्यावरण और अत्याधुनिक अंतरिक्ष अनुसंधान में भी भारत को नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाला साबित होगा।
