नई दिल्ली। भारत में बुलेट ट्रेन का सपना जल्द ही हकीकत में बदलने वाला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया जापान यात्रा के दौरान एक बड़ा अपडेट सामने आया है। जापान ने भारत को अपनी सबसे उन्नत E10 सीरीज शिंकानसेन बुलेट ट्रेन देने का फैसला किया है। यह ट्रेन न केवल अपनी रफ्तार और भूकंपरोधी तकनीक के लिए जानी जाएगी, बल्कि यात्रियों को अभूतपूर्व सुविधाएं भी प्रदान करेगी। यह ट्रेन मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर पर 2030 तक दौड़ेगी, जिससे 508 किलोमीटर का सफर मात्र 2 घंटे 7 मिनट में पूरा होगा।
E10 शिंकानसेन की खास विशेषताएं
E10 सीरीज शिंकानसेन जापान की ईस्ट जापान रेलवे कंपनी (JR East) द्वारा विकसित सबसे उन्नत बुलेट ट्रेन है। यह मौजूदा E5 और E2 सीरीज का अपग्रेडेड संस्करण है। इसकी कुछ प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:
- उच्च गति और उन्नत ब्रेकिंग सिस्टम: E10 की अधिकतम परिचालन गति 320 किमी प्रति घंटा है, लेकिन यह 360 किमी प्रति घंटा तक की रफ्तार हासिल कर सकती है। इसका ब्रेकिंग सिस्टम इतना उन्नत है कि यह टॉप स्पीड से 3.4 किमी से कम दूरी में रुक सकती है, जबकि E5 को 4 किमी की आवश्यकता होती है।
- भूकंपरोधी तकनीक: ट्रेन में L-आकार के गाइड और लेटरल डैम्पर्स लगाए गए हैं, जो भूकंप के झटकों के दौरान ट्रेन को पटरी से उतरने से बचाते हैं और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।
- यात्री सुविधाएं: E10 में ज्यादा सामान रखने की जगह, व्हीलचेयर यात्रियों के लिए विशेष विंडो सीट्स, और लग्जरी बिजनेस क्लास सीट्स उपलब्ध होंगी। इसमें हर सीट पर पावर आउटलेट, यूएसबी पोर्ट, बड़ा फोल्डिंग डेस्क, और वाई-फाई की सुविधा होगी। डिजाइन में जापान के प्रसिद्ध चेरी ब्लॉसम (सकुरा) फूलों की थीम का उपयोग किया गया है।
- ऑटोमेशन की संभावना: भविष्य में इस ट्रेन को पूरी तरह स्वचालित (ऑटोमैटिक) मोड में चलाने की क्षमता होगी, जो इसे और भी सुरक्षित और कुशल बनाएगी।
भारत में E10 का आगमन
E10 शिंकानसेन सीरीज अभी निर्माण के चरण में है और जापान में इसे 2030 में लॉन्च किया जाएगा। भारत में भी यह ट्रेन उसी समय शुरू होगी, जिसका मतलब है कि भारत और जापान में E10 का एक साथ उद्घाटन होगा। शुरुआती चरण में, 2027-28 में मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर पर E5 और E3 सीरीज की ट्रेनें अस्थायी रूप से चलेंगी, जिन्हें बाद में E10 से बदला जाएगा। पीएम मोदी ने जापान यात्रा के दौरान उस फैक्ट्री का दौरा भी किया, जहां E10 ट्रेन का निर्माण हो रहा है।
जापान ने क्यों चुनी E10?
मूल योजना के तहत भारत को E5 सीरीज की शिंकानसेन ट्रेनें दी जानी थीं, लेकिन प्रोजेक्ट में देरी और जापान में नई तकनीक के विकास के कारण अब E10 सीरीज की पेशकश की गई है। यह कदम भारत-जापान के बीच गहरे रणनीतिक सहयोग को दर्शाता है। जापान ने भारत को दो E5 और E3 ट्रेन सेट मुफ्त में देने का भी फैसला किया है, जो 2026 में भारत पहुंचेंगी और प्रोजेक्ट के परीक्षण में मदद करेंगी। इन ट्रेनों का उपयोग भारत की जलवायु परिस्थितियों, जैसे उच्च तापमान और धूल, के लिए E10 को अनुकूलित करने में किया जाएगा।
मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट
मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (MAHSR) भारत का पहला बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट है, जिसकी नींव 2017 में पीएम मोदी और तत्कालीन जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने रखी थी। 508 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर में 352 किमी गुजरात और 156 किमी महाराष्ट्र में है। प्रोजेक्ट को जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) द्वारा 80% सस्ते लोन के माध्यम से फंड किया जा रहा है, जिसकी ब्याज दर केवल 0.1% है।
हालांकि, प्रोजेक्ट में शुरुआती देरी के कारण यह 2024 के बजाय 2028 तक पूरा होगा। 2027 में इसका पहला हिस्सा गुजरात में शुरू होने की उम्मीद है। इस कॉरिडोर में 21 किमी लंबी अंडरसी टनल और कई वायडक्ट्स शामिल हैं, जिनका निर्माण तेजी से चल रहा है।
प्रोजेक्ट में देरी के कारण
भारत में बुलेट ट्रेन की अवधारणा पर पहली बार 2009 में विचार शुरू हुआ था। रेलवे मंत्रालय और JICA को व्यवहार्यता अध्ययन में चार साल लगे, और फंडिंग के लिए समझौता करने में दो साल और। इसके बाद, भूमि अधिग्रहण और अन्य चुनौतियों ने प्रोजेक्ट को धीमा कर दिया। अब, सभी सिविल कॉन्ट्रैक्ट्स आवंटित हो चुके हैं और काम तेजी से आगे बढ़ रहा है।
भारत में बुलेट ट्रेन का भविष्य
E10 शिंकानसेन के साथ, भारत का हाई-स्पीड रेल नेटवर्क न केवल यात्रा के समय को कम करेगा, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल और सुरक्षित परिवहन का भी प्रतीक बनेगा। यह ट्रेन 92% कम कार्बन उत्सर्जन करती है, जो इसे हवाई यात्रा का एक बेहतर विकल्प बनाती है। साथ ही, भारत स्वदेशी स्तर पर भी हाई-स्पीड ट्रेनें विकसित कर रहा है, जिनमें इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) और BEML द्वारा 280 किमी प्रति घंटा की रफ्तार वाली ट्रेनें शामिल हैं।