नई दिल्ली। हर साल भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पावन पर्व देशभर में उत्साह और भक्ति के साथ मनाया जाता है। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मथुरा में मध्यरात्रि को रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इस दिन भक्त व्रत रखते हैं, भगवान के बाल स्वरूप का श्रृंगार करते हैं और उनकी प्रिय वस्तुएं जैसे माखन और मिसरी अर्पित करते हैं। इस बार जन्माष्टमी की तारीख को लेकर कुछ असमंजस है, क्योंकि कुछ लोग 15 अगस्त को तो कुछ 16 अगस्त को इसे मना रहे हैं। आइए जानते हैं सही तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा की पूरी विधि।
जन्माष्टमी 2025: सही तिथि और शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 15 अगस्त 2025 को रात 11:49 बजे शुरू होगी और 16 अगस्त 2025 को रात 9:34 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर, जन्माष्टमी का व्रत और उत्सव 16 अगस्त 2025 को मनाया जाएगा। इस दिन मध्यरात्रि पूजा का शुभ मुहूर्त रात 12:04 बजे से 12:47 बजे तक रहेगा, जो कुल 43 मिनट का होगा। चंद्रोदय का समय रात 11:32 बजे होगा।

इस बार रोहिणी नक्षत्र का संयोग अष्टमी तिथि के साथ नहीं बन रहा है। रोहिणी नक्षत्र 17 अगस्त को सुबह 4:38 बजे शुरू होगा और 18 अगस्त को सुबह 3:17 बजे समाप्त होगा। इस कारण कुछ भक्तों में तारीख को लेकर भ्रम है। हालांकि, वैष्णव परंपरा और पंचांग के अनुसार, 16 अगस्त को जन्माष्टमी मनाना सबसे उचित रहेगा।
जन्माष्टमी पूजा विधि
जन्माष्टमी के दिन भक्तों को निम्नलिखित विधि से पूजा करनी चाहिए:
- संकल्प और स्नान: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और जन्माष्टमी व्रत (निर्जला या फलाहार) का संकल्प लें।
- पंचामृत स्नान: मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति को पंचामृत (दूध, दही, शहद, शक्कर, घी) से स्नान कराएं, फिर शुद्ध जल से स्नान करवाएं।
- श्रृंगार: भगवान को पीतांबर वस्त्र, तुलसी दल, वैजयंती फूल और गोपी चंदन से श्रृंगार करें। काले वस्त्रों का उपयोग न करें।
- भोग: शंख में माखन, मिसरी, धनिया पंजीरी और अन्य प्रसाद रखकर भोग लगाएं।
- पूजा और आरती: श्रीकृष्ण चालीसा, मंत्र जाप और भजन-कीर्तन करें। पूजा के अंत में आरती करें और प्रसाद वितरित करें।

पूजा सामग्री
पूजा के लिए निम्नलिखित सामग्री तैयार करें:
- लड्डू गोपाल की मूर्ति
- पीला कपड़ा और चौकी
- मोर पंख, बांसुरी, शंख
- गंगाजल, पंचामृत, शुद्ध घी
- तुलसी दल, केसर, फल
- धूप, दीप और प्रसाद (माखन, मिसरी, धनिया पंजीरी)
महत्वपूर्ण मंत्र
जन्माष्टमी पर निम्नलिखित मंत्रों का जाप करें:
- ॐ कृष्णाय नमः
- ॐ श्री कृष्णः शरणं ममः
- हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे

जन्माष्टमी का महत्व
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी भगवान श्रीकृष्ण के अवतरण का उत्सव है, जो भक्ति, प्रेम और धर्म के प्रतीक हैं। इस दिन भक्त व्रत, पूजा और भजन-कीर्तन के माध्यम से भगवान की कृपा प्राप्त करते हैं। मान्यता है कि जन्माष्टमी की पूजा से जीवन में सुख, समृद्धि और शांति प्राप्त होती है। मथुरा, वृंदावन और द्वारका जैसे स्थानों में इस दिन विशेष आयोजन जैसे रासलीला, दही-हांडी और नंद महोत्सव का उत्साह देखने लायक होता है।