लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र (11-13 अगस्त 2025) के तीसरे दिन बुधवार को वृंदावन के विश्व प्रसिद्ध श्री बांके बिहारी मंदिर के प्रबंधन और संरक्षण के लिए प्रस्तावित ‘उत्तर प्रदेश श्री बांके बिहारी जी मंदिर न्यास विधेयक, 2025’ को ध्वनि मत से पारित कर दिया गया। हालांकि, यह विधेयक तत्काल प्रभाव से लागू नहीं होगा, क्योंकि इसका मामला सुप्रीम कोर्ट और इलाहाबाद हाईकोर्ट में विचाराधीन है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में एक अंतरिम समिति गठित करने का आदेश दिया है, जिसके अंतिम निर्णय तक विधेयक को लागू करने पर रोक है। आइए जानते हैं इस विधेयक और इससे जुड़े विवाद की पूरी कहानी।
विधानसभा में चर्चा और हंगामा
मानसून सत्र के तीसरे दिन विधानसभा की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू हुई और कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा हुई। बांके बिहारी ट्रस्ट विधेयक पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के बहुमत के कारण यह ध्वनि मत से आसानी से पारित हो गया। हालांकि, सत्र के दौरान विपक्षी दलों, विशेष रूप से समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायकों ने विभिन्न मुद्दों पर हंगामा किया। मंगलवार को भी सत्र के दूसरे दिन सपा विधायकों ने वेल में आकर नारेबाजी की थी, जिसके जवाब में योगी सरकार के मंत्रियों ने कड़ा रुख अपनाया।
बांके बिहारी ट्रस्ट विधेयक: उद्देश्य और विशेषताएं
‘उत्तर प्रदेश श्री बांके बिहारी जी मंदिर न्यास विधेयक, 2025’ का उद्देश्य वृंदावन के श्री बांके बिहारी मंदिर के प्रशासन को सुचारु और पारदर्शी बनाना है। इस विधेयक के तहत एक वैधानिक न्यास (ट्रस्ट) का गठन प्रस्तावित है, जिसमें 11 सदस्य होंगे, जिनमें अधिकतम 7 सरकारी अधिकारी (एक्स-ऑफिशियो) शामिल हो सकते हैं। सभी सदस्यों को सनातन धर्म का अनुयायी होना अनिवार्य है। यह न्यास मंदिर के दैनिक प्रबंधन, भक्तों की सुविधाओं और मंदिर परिसर के विकास कार्यों की जिम्मेदारी संभालेगा।
इससे पहले मई 2025 में योगी सरकार ने इस विधेयक को अध्यादेश के रूप में लागू किया था, जिसे बाद में विधानसभा में विधेयक के रूप में पेश किया गया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस अध्यादेश पर सवाल उठाए और इसके संवैधानिक वैधता की जांच के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट को निर्देश दिया।
कोर्ट में लंबित मामला
सुप्रीम कोर्ट ने 8 अगस्त 2025 को उत्तर प्रदेश श्री बांके बिहारी जी मंदिर न्यास अध्यादेश, 2025 के तहत गठित समिति के संचालन पर रोक लगा दी थी। कोर्ट ने इस मामले को इलाहाबाद हाईकोर्ट को सौंपते हुए निर्देश दिया कि जब तक हाईकोर्ट इसकी संवैधानिक वैधता पर फैसला नहीं लेता, तब तक अध्यादेश लागू नहीं होगा। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर के प्रबंधन के लिए एक अंतरिम समिति का गठन किया, जिसकी अध्यक्षता इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज अशोक कुमार करेंगे। इस 12 सदस्यीय समिति में सरकारी अधिकारी और गोस्वामी परिवार के प्रतिनिधि शामिल हैं, जो मंदिर के दैनिक कार्यों और भक्तों की सुविधाओं का प्रबंधन करेंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि मंदिर के धन का उपयोग केवल भक्तों की सुविधा और विकास कार्यों के लिए किया जाना चाहिए, न कि निजी हितों के लिए। कोर्ट ने मई 2025 के अपने एक आदेश को भी संशोधित किया, जिसमें मंदिर के कोष से 5 एकड़ जमीन खरीदने की अनुमति दी गई थी। कोर्ट ने इस आदेश को प्रक्रियात्मक रूप से गलत माना, क्योंकि मंदिर प्रबंधन को सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया था।
इलाहाबाद हाईकोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 26 अगस्त 2025 को निर्धारित है। तब तक अंतरिम समिति मंदिर के प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालेगी।
बांके बिहारी मंदिर विवाद की टाइमलाइन
- अक्टूबर 2022: जन्माष्टमी के दौरान मंदिर में भारी भीड़ के बीच भगदड़ की घटना हुई, जिसमें कई श्रद्धालु घायल हुए। इसके बाद सरकार ने भीड़ प्रबंधन और मंदिर प्रशासन में सुधार के लिए कदम उठाने शुरू किए।
- नवंबर 2023: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंदिर के आसपास कॉरिडोर विकास की अनुमति दी, लेकिन मंदिर के कोष से 262.5 करोड़ रुपये के उपयोग पर रोक लगा दी।
- मार्च 2025: हाईकोर्ट ने मंदिर प्रबंधन से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए अधिवक्ता संजय गोस्वामी को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया।
- 15 मई 2025: सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर के कोष से 5 एकड़ जमीन खरीदने की अनुमति दी, लेकिन यह आदेश विवादास्पद रहा क्योंकि मंदिर प्रबंधन को सुनवाई का अवसर नहीं मिला।
- 26 मई 2025: उत्तर प्रदेश सरकार ने श्री बांके बिहारी जी मंदिर न्यास अध्यादेश, 2025 लागू किया।
- 28 जुलाई 2025: सुप्रीम कोर्ट ने अध्यादेश की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाए और मामले को हाईकोर्ट को सौंपा।
- 8 अगस्त 2025: सुप्रीम कोर्ट ने अध्यादेश के तहत गठित समिति पर रोक लगाई और अंतरिम समिति का गठन किया।
- 13 अगस्त 2025: उत्तर प्रदेश विधानसभा ने विधेयक को ध्वनि मत से पारित किया, लेकिन यह कोर्ट के अंतिम निर्णय तक लागू नहीं होगा।
अब आगे क्या होगा?
- हाईकोर्ट का फैसला: इलाहाबाद हाईकोर्ट 26 अगस्त 2025 को इस मामले की सुनवाई करेगा। हाईकोर्ट के फैसले से यह तय होगा कि विधेयक संवैधानिक रूप से वैध है या नहीं।
- अंतरिम समिति की भूमिका: तब तक सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित अंतरिम समिति मंदिर के दैनिक प्रबंधन, भीड़ नियंत्रण, और भक्तों की सुविधाओं का ध्यान रखेगी। इस समिति को मंदिर के कोष का उपयोग केवल विकास कार्यों और भक्तों की सुविधा के लिए करने का निर्देश है।
- संभावित परिणाम: यदि हाईकोर्ट विधेयक को वैध ठहराता है, तो यह लागू हो सकता है, और मंदिर का प्रबंधन न्यास के तहत होगा। यदि विधेयक को असंवैधानिक घोषित किया जाता है, तो मंदिर का प्रबंधन गोस्वामी परिवार और पारंपरिक प्रणाली के पास रहेगा।
क्यों है विवाद?
बांके बिहारी मंदिर का प्रबंधन ऐतिहासिक रूप से स्वामी हरिदास जी के वंशजों और अनुयायियों द्वारा किया जाता रहा है। सरकार के अध्यादेश और विधेयक को गोस्वामी परिवार और मंदिर प्रबंधन ने ‘प्राइवेट मंदिर’ पर सरकारी नियंत्रण का प्रयास माना है। सुप्रीम कोर्ट ने भी सरकार के ‘जल्दबाजी’ और ‘गुप्त तरीके’ से मंदिर के कोष और प्रबंधन को नियंत्रित करने के प्रयासों पर सवाल उठाए हैं।