नई दिल्ली : मानसून अपने साथ ठंडी हवाओं और हरियाली का सुकून जरूर लाता है, लेकिन यह मौसम कई स्वास्थ्य समस्याओं को भी जन्म देता है। इन्हीं में से एक आम और परेशान करने वाली समस्या है साइनस इंफेक्शन या साइनोसाइटिस। बारिश के मौसम में बहुत से लोग सिरदर्द, बंद नाक, गले में खराश और आंखों के पास भारीपन जैसे लक्षणों से जूझते हैं, जो अक्सर साइनस की ओर इशारा करते हैं।

मानसून में क्यों बढ़ता है साइनस इंफेक्शन?
1. हवा में नमी और बैक्टीरियल वृद्धि:
दिल्ली के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. कमलजीत सिंह कैंथ बताते हैं कि मानसून के दौरान वातावरण में नमी काफी बढ़ जाती है, जो बैक्टीरिया और फंगस के पनपने के लिए अनुकूल होती है। ये सूक्ष्मजीव नाक के रास्ते साइनस कैविटी तक पहुंचकर सूजन और ब्लॉकेज पैदा करते हैं, जिससे म्यूकस जमा होता है और साइनस के लक्षण उभरने लगते हैं।
2. एलर्जी की संभावना ज्यादा:
बारिश के मौसम में मिट्टी, पत्तियों और हवा में फैले परागकण, फफूंदी और धूल से एलर्जी होने की संभावना बढ़ जाती है। जिन लोगों को एलर्जिक राइनाइटिस होता है, उनके लिए मानसून मुश्किल भरा हो सकता है। ये एलर्जन साइनस कैविटी में सूजन और जाम की स्थिति पैदा करते हैं।
3. बार-बार सर्दी-जुकाम:
तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण मानसून के दौरान प्रतिरक्षा प्रणाली प्रभावित होती है, जिससे लोग बार-बार सर्दी-जुकाम से पीड़ित होते हैं। यदि जुकाम लंबे समय तक ठीक न हो तो यह साइनस इंफेक्शन में बदल सकता है।
4. वेंटिलेशन की कमी:
बारिश में लोग दरवाजे-खिड़कियां बंद रखते हैं, जिससे हवा का प्रवाह रुक जाता है। इससे घर में मौजूद एलर्जन और बैक्टीरिया बाहर नहीं निकलते, जो सांस की समस्याओं और साइनस को और बढ़ा सकते हैं।
साइनस क्या होता है और कैसे करता है असर?
साइनस, हमारे चेहरे की हड्डियों में स्थित खाली कैविटी होती हैं जो नाक के चारों ओर होती हैं माथे में, गालों के अंदर, आंखों के पीछे और नाक के दोनों ओर। ये कैविटी म्यूकस बनाकर नाक को संक्रमण से बचाती हैं, लेकिन जब म्यूकस ड्रेनेज बाधित होता है या संक्रमण होता है तो ये सूज जाती हैं और दर्द व दबाव पैदा होता है।

डॉक्टरों की सलाह और बचाव के उपाय
- नाक और गले की नियमित सफाई रखें।
- गुनगुना पानी पिएं और हाइड्रेटेड रहें।
- स्टीम इनहेलिंग (भाप) लें और नमक वाले पानी से गरारे करें।
- घर को हवादार और साफ रखें।
- तीन दिन से ज्यादा लक्षण बने रहने पर डॉक्टर से संपर्क करें।
मानसून में सावधानी और स्वच्छता बरत कर साइनस की परेशानी को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। यदि लक्षण गंभीर हों या बार-बार लौटें, तो विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।