धरती पूरी तरह सपाट नहीं है, बल्कि यह एक गोलाकार (oblate spheroid) आकृति में है और अपने अक्ष पर लगभग 23.5 डिग्री झुकी हुई है। अक्सर यह सवाल लोगों के मन में आता है कि अगर धरती झुकी हुई है, तो यह आखिर गिरती क्यों नहीं? विज्ञान इस सवाल का बेहद सरल और तार्किक उत्तर देता है—गुरुत्वाकर्षण बल और जड़त्व की मदद से।
1. गुरुत्वाकर्षण बल: धरती को थामे रखता है
सर आइज़ैक न्यूटन द्वारा खोजा गया यह बल पृथ्वी पर हर वस्तु को उसकी ओर खींचता है। यही बल हमें, समुद्रों को, पेड़ों को और वायुमंडल को धरती की सतह पर स्थिर बनाए रखता है।
2. जड़त्व बल: धरती को संतुलन में रखता है
न्यूटन के गति के नियम के अनुसार, कोई भी वस्तु जब गति में होती है, तो वह तब तक उसी दिशा में चलती रहती है जब तक कोई बाहरी बल न लगे। धरती भी अपनी धुरी पर घूमती रहती है और सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाती है। यही गति उसे संतुलन में रखती है और “गिरने” नहीं देती।
3. अंतरिक्ष में गिरना क्या होता है?
जब कोई वस्तु गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में किसी बड़े पिंड की ओर आकर्षित होती है, तो उसे “गिरना” कहते हैं। पृथ्वी भी हर पल सूर्य की ओर गिर रही होती है, लेकिन उसकी गति इतनी तेज़ है (लगभग 1,08,000 किमी/घंटा) कि वह सीधे गिरने के बजाय सूर्य की परिक्रमा करती रहती है।
निष्कर्ष
धरती भले ही झुकी हुई हो, लेकिन गुरुत्वाकर्षण और जड़त्व के संतुलन के कारण यह अपने स्थान पर स्थिर बनी रहती है। यह विज्ञान की वह समझ है, जो न केवल धरती को बल्कि पूरे ब्रह्मांड को संतुलन में बनाए रखती है।