नई दिल्ली | 12 जुलाई 2025
भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) के बीच ऐतिहासिक व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौता (TEPA) अब वास्तविकता बनने के और करीब पहुंच गया है। स्विट्जरलैंड ने भी इस समझौते को औपचारिक मंजूरी दे दी है, जिससे यह समझौता अक्टूबर 2025 से लागू होने की संभावना है।
भारत में स्विट्जरलैंड की राजदूत माया तिस्साफी ने इसे भारत-स्विट्जरलैंड द्विपक्षीय संबंधों में एक “मील का पत्थर” करार दिया। उन्होंने बताया कि जनमत संग्रह की समयसीमा पूरी होने के साथ ही स्विस जनता ने इस समझौते को मौन स्वीकृति दे दी है।
प्रमुख बिंदु:
- स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, लिशटेंस्टीन और आयरलैंड मिलकर भारत के साथ यह समझौता कर रहे हैं।
- EFTA देश अगले 15 वर्षों में भारत में 100 अरब डॉलर का निवेश करेंगे।
- इस निवेश से 10 लाख नौकरियों के सृजन की संभावना है।
- TEPA के तहत टैरिफ में कटौती, सीमा शुल्क प्रक्रिया का सरलीकरण, बौद्धिक संपदा की सुरक्षा, और स्थायी व्यापार ढांचे को बढ़ावा मिलेगा।
मार्च 2025 में भारत और EFTA ने करीब 16 वर्षों की बातचीत के बाद इस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। आयरलैंड, लिशटेंस्टीन और नॉर्वे पहले ही इस पर स्वीकृति दे चुके थे, और अब स्विट्जरलैंड की मंजूरी के बाद यह समझौता लागू होने के लिए तैयार है।
स्विट्जरलैंड की भूमिका:
वर्तमान में स्विट्जरलैंड भारत में 12वां सबसे बड़ा निवेशक है। TEPA के लागू होने के बाद यह रैंक और निवेश में और बढ़ोतरी की उम्मीद है।
यह समझौता न केवल भारत और EFTA देशों के बीच व्यापार को गति देगा, बल्कि दीर्घकालिक निवेश और रोजगार के क्षेत्र में भी एक नई शुरुआत का मार्ग प्रशस्त करेगा।